विकेटों का शतक सबसे पहले किया पूरा, घरेलू क्रिकेट का बना बादशाह, फिर एक बीमारी से जंग हारा ये अंग्रेज क्रिकेटर | Johnny briggs cricketer born on this day know his career and journey

जॉनी ब्रिग्स की गिनती महान खिलाड़ियों में होती है. (File Photo)

इस खिलाड़ी के घरेलू क्रिकेट के आंकड़े देखकर हर कोई हैरान रह जाएगा और इसलिए इस खिलाड़ी को घरेलू क्रिकेट का बादशाह कहा गया.

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  • Publish Date – 7:46 am, Sun, 3 October 21Edited By: साकेत शर्मा
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कई खिलाड़ी ऐसे होते हैं जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तो कमाल करते ही हैं लेकिन घरेलू क्रिकेट में भी ऐसे कारनामे कर जाते हैं कि जिन्हें देखकर आंखें खुली की खुली रह जाती हैं. ऐसे ही क्रिकेटरों को घरेलू क्रिकेट का बादशाह कहा जाता है. भारत में अमोल मजूमदार इसका उदाहरण है. इंग्लैंड में भी एक ऐसा खिलाड़ी रहा है जो घरेलू क्रिकेट में रनों का पहाड़ लगा चुका है तो विकेटों का अंबार भी. इस खिलाड़ी का नाम है जॉन ब्रिग्स (John Briggs). जॉन का जन्म आज ही के दिन यानी तीन अक्टूबर 1862 को नॉटिंघमशार में हुआ था. वह दशकों पहले ऐसे रिकॉर्ड बना चुके हैं जो आज भी आसान नहीं हैं. ब्रिग्स के आंकड़े देखकर हर कोई हैरान रह जाएगा. बल्ले और गेंद दोनों से इस खिलाड़ी ने अपनी टीम को कई जीतें दिलाई हैं. साथ ही रिकॉर्ड बनाए हैं.

ब्रिग्स के प्रथम श्रेणी क्रिकेट की बात की जाए तो उन्होंने 535 मैच खेले और 14,092 रन बनाए. इसमें 10 शतक और 58 अर्धशतक शामिल हैं. विकेटों के कॉलम में यहां उनके नाम 2221 का आंकड़ा है. वहीं इंग्लैंड के लिए इस खिलाड़ी ने कुल 33 टेस्ट मैच खेले और 815 रन बनाए. टेस्ट में उन्होंने इंग्लैंड के लिए 118 विकेट भी लिए. बाएं हाथ के इस गेंदबाज ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कई बेहतरीन प्रदर्शन किए. उनमें से एक है साउथ अफ्रीका के खिलाफ 1888-89 में किया गया प्रदर्शन जब उन्होंने 15 विकेट लिए थे. इसमें एक खास बात ये थी कि इन 15 विकेटों में से 14 विकेट उन्होंने बोल्ड करके लिए. वह टेस्ट क्रिकेट में सबसे पहले 100 विकेट लेने वाले गेंदबाज थे.

दिमाग की बीमारी से रहे परेशान

इस बेहतरीन क्रिकेटर को मानिसक बीमारी ने काफी परेशान किया. उन्हें एपलिप्सी नाम की बीमारी के लक्षण थे. उस समय इसका कोई पक्का ईलाज नहीं था और ये कभी भी वापस आ सकती थी. इस बीमारी का पता चला 1900 के सीजन में. बीमारी के पता चलने के कुछ महीने बाद उन्हें दोबारा इस बीमारी का अटैक आया. इसी कारण उन्होंने 1901 सीजन में हिस्सा नहीं लिया. उनका निधन 11 जनवरी 1902 को 39 साल की उम्र में हो गया. वह नॉटिंघम के थे लेकिन खेले लंकाशर से थे. उन्होंने यहां 20 साल से ज्यादा का समय बिताया. उन्होंने लंकाशर से खेलने के लिए जब ट्रायल दी तब वह 1879 में पांच काउंटी मैच खेल चुके थे. उनकी फील्डिंग उन्हें बाकी खिलाड़ियों से अलग करती थी. वह मैदान पर काफी तेज थे.

ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ किया डेब्यू

घरेलू क्रिकेट में वह लगातार अच्छा कर रहे थे और नाम कमा रहे थे. इसी कारण 1884 में दिसंबर के महीने में उन्हें अपना पहला अंतरराष्ट्रीय मैच खेलने का मौका मिला. उन्होंने एडिलेड पर 12 से 16 दिसंबर के बीच खेले गए मैच में डेब्यू किया. अपने पहले मैच में उन्होंने गेंदबाजी नहीं की थी. बल्लेबाजी में उन्हें पहली पारी में ही मौका मिला जिसमें वे सिर्फ एक रन ही बना पाए. लेकिन क्रिकेट के मक्का कहे जाने वाले लॉर्ड्स मैदान पर उन्होंने एक मैच में ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाजों की कमर तोड़ कर रख दी थी. 1886 में खेले गए इस मैच में इंग्लैंड ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 353 रन बनाए. ऑस्ट्रेलिया को अच्छी शुरुआत मिली थी और 45 रन तक उसने कोई विकेट नहीं खोया था. इसके बाद इंग्लैंड के कप्तान ने ब्रिग्स को गेंद थमाई और ऑस्ट्रेलियाई टीम 121 रनों पर ऑल आउट हो गई. ब्रिग्स ने 34 ओवर फेंके और 22 मेडेन निकाले. इस मैच में उन्होंने 25 रन देकर पांच विकेट लिए. ऑस्ट्रेलिया को फॉलो ऑन के लिए बुलाया गया और दूसरी पारी में ब्रिग्स ने 45 रन देकर छह विकेट लिए. यहां से ब्रिग्स ने अपना एक अलग मुकाम बनाया. 1900 के बाद जब उनकी बीमारी का पहली बार पता चला तो उन्होंने आराम किया लेकिन जब वह वापस लौटकर आए थो अपनी गेंदों से उन्होंने कमाल कर डाला. उन्होंने घरेलू क्रिकेट में 127 विकेट लिए. हालांकि बीमारी के कारण वह बेहद कम उम्र में दुनिया छोड़ गए.

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