Cultural – भागवत कथा : सूर्य के प्रकाश में भी उल्लू को अंधकार ही दिखता है

बिल्सी में भागवत कथा सुनाते महाराज स्वामी रामचंद्राचार्य। संवाद
– फोटो : BADAUN

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बिल्सी। जेपी जैन स्कूल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के चौथे दिन पुष्कर पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रामचंद्राचार्य जी महाराज ने पूतना के उद्धार की लीला का वर्णन किया।
उन्होंने कहा कि जब पूतना ने भगवान को कपट पूर्ण ढंग से मारने का प्रयास किया तो उसकी माया का प्रभाव यशोदा और रोहिणी पर तो पड़ा पर भगवान कृष्ण पर नहीं पड़ा। जिन सहनशील भगवान ने भृगु के चरण प्रहार को अपने वक्ष स्थल पर धारण कर लिया। उनको पूतना उद्धार करने के लिए क्रोध धारण करना पड़ा। भगवान का दिव्य रूप देखकर भी वह अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ पाई क्योंकि उल्लू को सूर्य के प्रकाश में भी अंधकार ही दिखाई देता है। इसलिए पूतना पर भगवान के दर्शन और स्पर्श का प्रभाव नहीं पड़ा।
जो पूतना भगवान को कपट पूर्ण ढंग से मारने आई उसे भगवान ने दुर्लभ गति प्रदान की। इस मौके पर महंत मटरुमल शर्मा, प्रदीप शर्मा, संजीव शर्मा, दीपक बाबा, नरेंद्र गरल,आशीष वशिष्ठ, रंजन माहेश्वरी, जितेंद्र कुमार, राजेश माहेश्वरी आदि मौजूद रहे। संवाद

बिल्सी। जेपी जैन स्कूल में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान सप्ताह के चौथे दिन पुष्कर पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामानुजाचार्य स्वामी रामचंद्राचार्य जी महाराज ने पूतना के उद्धार की लीला का वर्णन किया।

उन्होंने कहा कि जब पूतना ने भगवान को कपट पूर्ण ढंग से मारने का प्रयास किया तो उसकी माया का प्रभाव यशोदा और रोहिणी पर तो पड़ा पर भगवान कृष्ण पर नहीं पड़ा। जिन सहनशील भगवान ने भृगु के चरण प्रहार को अपने वक्ष स्थल पर धारण कर लिया। उनको पूतना उद्धार करने के लिए क्रोध धारण करना पड़ा। भगवान का दिव्य रूप देखकर भी वह अपनी दुष्टता को नहीं छोड़ पाई क्योंकि उल्लू को सूर्य के प्रकाश में भी अंधकार ही दिखाई देता है। इसलिए पूतना पर भगवान के दर्शन और स्पर्श का प्रभाव नहीं पड़ा।

जो पूतना भगवान को कपट पूर्ण ढंग से मारने आई उसे भगवान ने दुर्लभ गति प्रदान की। इस मौके पर महंत मटरुमल शर्मा, प्रदीप शर्मा, संजीव शर्मा, दीपक बाबा, नरेंद्र गरल,आशीष वशिष्ठ, रंजन माहेश्वरी, जितेंद्र कुमार, राजेश माहेश्वरी आदि मौजूद रहे। संवाद