how to explain shame to a child: पेरेंट्स की इन हरकतों से बच्‍चे हो जाते हैं शर्मिंदा, आज ही कर दें बंद तो अच्‍छा होगा

पेरेंटिंग एक ऐसा विषय है जिसके कोई नियम या सीमा नहीं है और कोई आपको ये नहीं बता सकता कि आपको अपने बच्‍चे की परवरिश किस तरह करनी चाहिए क्‍योंकि ये चीज तो आप खुद अपनी गलतियों और एक्‍सपीरियंस से सीखते हैं।

हर बच्‍चा अलग होता है इसलिए हर पेरेंट्स के लिए पेरेंटिंग टिप्‍स भी अलग बन जाते हैं लेकिन कुछ चीजें ऐसी हैं जो अमूमन सभी पेरेंट्स करते हैं और उनमें से एक है बच्‍चों को शर्मिंदा करना।

जी हां, कुछ पेरेंट्स को लगता है कि अगर वो पब्लिकली या मेहमानों के सामने या अकेले में भी शर्मिंदा महसूस करवाएंगे, तो इससे बच्‍चा सुधर जाएगा जबकि असल में ऐसा नहीं है।

यहां हम आपको पेरेंट्स के कुछ ऐसे स्‍टेटमेंट्स के बारे में बता रहे हैं, जो बच्‍चों को शर्मिंदगी महसूस करवा सकते हैं इसलिए पेरेंट्स को ये चीजें बोलने से बचना चाहिए।

​अपने भाई या बहन से सीखो

हर बच्‍चा अलग होता है इसलिए उसका काम करने का तरीका भी आपसे या अपने भाई या बहन से अलग हो सकता है। अगर आप बच्‍चे को काम करना सिखाने की बजाय उसक तुलना उसके भाई या बहन से करेंगे, तो इससे बच्‍चे का आत्‍मविश्‍वास टूटेगा और वो खुद को दूसरों से कम समझने लगे।

​इतना रोने की जरूरत नहीं है

बच्‍चे मासूम होते हैं और जब उनके मन की नहीं होती, तो वो रोने लगते हैं। बच्‍चों को आपको कड़वी बातों से हैंडल नहीं करना है बल्कि उन्‍हें प्‍यार से रखना है।

जब बच्‍चे किसी बात से दुखी या नाराज होकर रोता है, तो उसे ये न कहें कि तुम तो ऐसे रो रहे हो जैसे दुनिया खत्‍म हो गई है।

अक्‍सर बच्‍चे रोकर ही अपनी फीलिंग्‍स बताते हैं और जब आप रोने पर उसे डांट देंगे तो वो अपने मन की बात आप तक पहुंचाने से कतराने लगेगा। ये आपके और बच्‍चे दोनों के लिए ही ठीक नहीं है।

​तुमसे थक गई हूं मैं

बच्‍चों को संभालना कोई आसान बात नहीं है। दिनभर दिमाग खर्च करना पड़ता है और बहुत एनर्जी भी लगती है। ऐसे में कई बार चिड़चिड़े होकर हम बच्‍चों को कुछ ऐसी चीजें बोल देते हैं जो उनके दिल को लग जाती हैं।

अक्‍सर पेरेंट बच्‍चों से तंग आकर कह देते हैं कि मैं तुम्‍हें संभालते-संभालते थक गई हूं, अब मुझसे दूर रहो कुछ देर। इस तरह की बातें बच्‍चों के दिल को दुखा सकती हैं।

​ज्‍यादा मत खाओ

बच्‍चों को उनकी लुक्‍स को लेकर कमेंट नहीं करना चाहिए। इससे बच्‍चों में बॉडी शेमिंग की प्रवृत्ति पैदा होगी। ऐसे बच्‍चे न सिर्फ अपनी बॉडी को लेकर कंफर्टेबल और कॉन्फिडेंट होते हैं बल्कि दूसरों की बॉडी को लेकर भी कमेंट करने की आदत, उनमें आ जाती है।

अगर आप अपने बच्‍चे को ज्‍यादा खाने से इसलिए टोकते हैं कि वो मोटा हो जाएगा तो आज ही ऐसा करना बंद कर दें।

बच्‍चों की सेहत के लिए चिंता दिखाने के कई और भी तरीके हैं जो बच्‍चों पर नेगेटिव प्रभाव नहीं डालेंगे।

बच्‍चे मत बनो

पेरेंट्स के लिए बच्‍चे कभी बड़े नहीं होते हैं और हमेशा जिद करते हैं लेकिन कई बार पेरेंट्स बच्‍चों को ये कहकर डांट देते हैं कि बेबी की तरह बिहेव मत करो।