Invesco drags Zee Entertainment to NCLT, demands to call EGM and remove MD | इन्वेस्को ने जी एंटरटेनमेंट को NCLT में घसीटा, EGM बुलाने और MD को निकालने की मांग

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मुंबई3 दिन पहले

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आखिरकार जी एंटरटेनमेंट में सबसे बड़े निवेशक इन्वेस्को ने कानूनी लड़ाई का सहारा ले ही लिया। जी एंटरटेनमेंट को इन्वेस्को ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) में घसीट लिया है। इन्वेस्को की मांग है कि कंपनी एक्स्ट्रा आर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) बुलाए और MD पुनीत गोयनका को बाहर निकाले।

मुंबई बेंच में लिस्ट हुआ मामला

NCLT की मुंबई बेंच में इस केस को सुनवाई के लिए लिस्ट किया गया है। इन्वेस्को की ओर से ध्रुव लीलाधर एंड कंपनी इस मामले को देख रही है। जबकि जी एंटरटेनमेंट की ओर से ट्राइलीगल मामले को देख रही है। नियम के अनुसार, अगर कोई कंपनी किसी कंपनी में 10% से ज्यादा की निवेशक है और वह EGM बुलाने के लिए नोटिस देती है, तो कंपनी को 3 हफ्ते के अंदर EGM बुलानी होती है।

इन्वेस्को की 18% के करीब हिस्सेदारी है

जी एंटरटेनमेंट में इन्वेस्को की 18% के करीब हिस्सेदारी है। इन्वेस्को ने कॉर्पोरेट गवर्नेंस का मुद्दा उठाते हुए EGM बुलाने की मांग की थी। इन्वेस्को ने पहले 11 सितंबर को EGM के लिए नोटिस दिया था। जी को यह नोटिस 12 सितंबर को मिला था। इसके अनुसार जी को 2 अक्टूबर तक EGM बुलाने की घोषणा करने का समय है। यदि जी एंटरटेनमेंट EGM की तारीख घोषित करने में फेल होती है तो इन्वेस्को खुद मीटिंग की तारीख घोषित कर सकती है।

पुनीत को हटाने के लिए पूछ सकती है इन्वेस्को

EGM में इन्वेस्को शेयरधारकों से यह पूछ सकती है कि वह जी एंटरटेनमेंट के MD पुनीत गोयनका को हटाने के लिए वोट करें। साथ ही 6 नए स्वतंत्र निदेशकों को जी के बोर्ड पर नियुक्त करने के लिए वोट करें। हालांकि कुछ जानकारों का मानना है कि इन्वेस्को के लिए NCLT का मामला थोड़ा उल्टा भी हो सकता है।

उदाहरण के लिए यदि NCLT यह फैसला देता है कि इस मामले को बाद में सुना जाएगा और यदि इसमें समय लगता है तो जी यह कह सकती है कि वह EGM बुलाने को तैयार थी, पर NCLT में मैटर जाने की वजह से उसने EGM नहीं बुलाया। इसलिए जब तक NCLT का फैसला नहीं आता, जी इस मामले को टाल सकती है।

दो स्वतंत्र निदेशकों ने दिया था इस्तीफा

इन्वेस्को ने जिस दिन EGM बुलाने का नोटिस दिया था, उसी दिन जी एंटरटेनमेंट के दो स्वतंत्र निदेशकों ने इस्तीफा दे दिया था। 22 सितंबर को जी के बोर्ड ने यह कहा कि वह सोनी पिक्चर्स के साथ मर्जर कर रहा है। इस मर्जर को अगले 90 दिनों में पूरा किया जाएगा। तब तक मर्जर से जुड़े प्रोसीजर पर काम होगा।

सोनी की डील से दिक्कत नहीं

सूत्रों के मुताबिक, इन्वेस्को को सोनी पिक्चर्च के साथ जी की डील से कोई दिक्कत नहीं है। पर इन्वेस्को चाहता है कि कॉर्पोरेट गवर्नेंस को लेकर जो मामला है उसे पहले सुना जाए। इसके लिए जी एंटरटेनमेंट को पहले EGM बुलानी होगी। सूत्रों का कहना है कि इन्वेस्को कानूनी तरीके से पुनीत गोयनका को हटाने की कोशिश करेगा।

विदेशी निवेशकों के पास 67.72% हिस्सा

जी एंटरटेनमेंट में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 4.77% जबकि फंड हाउसेज और दूसरे निवेशकों की हिस्सेदारी 95.23% है। इनमें म्यूचुअल फंड के पास 3.77%, विदेशी निवेशकों के पास 67.72% और LIC के पास 4.89% हिस्सा है। सूत्रों के मुताबिक, ग्लोबल असेट मैनेजमेंट कंपनी होने के नाते इन्वेस्को, विदेशी निवेशकों को अपने पक्ष में मोड़ सकती है। ऐसे में डील में पेंच फंस सकता है।

दरअसल, इन्वेस्को अपने निवेश पर 30-40% का फायदा चाहती है। उसने जी एंटरटेनमेंट में 400 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से पैसा लगाया है। उम्मीद के मुताबिक रिटर्न के लिए वो 500-550 रुपए प्रति शेयर पर ही अपना हिस्सा बेचने को तैयार होगी।

2019 में इन्वेस्को ने खरीदी थी हिस्सेदारी

जुलाई 2019 में इन्वेस्को ने कंपनी में 11% हिस्सेदारी खरीदने के लिए जी एंटरटेनमेंट के प्रमोटर्स के साथ डील की थी। यह सौदा 400 रुपए प्रति शेयर के हिसाब से 4,224 करोड़ रुपए में हुआ था। सूत्रों के मुताबिक इन्वेस्को की बगावत के बाद ही जी ग्रुप के फाउंडर सुभाष चंद्रा ने सोनी के साथ संपर्क साधा।

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