Jain Samaj Religious News Raipur Jinvani is a mirror see yourself in it save life Sadhvi Shubhankara

Publish Date: | Sat, 02 Oct 2021 05:05 PM (IST)

Jain Samaj Religious News Raipur: रायपुर ( नईदुनिया प्रतिनिधि)। संसार की लंबी यात्रा करते-करते हमें अब तक थकावट महसूस नहीं हुई, इसीलिए भटक रहे हैं और जिस दिन थक जाएंगे, हमें अपने घर की याद आ जाएगी यानि आत्मा के आनंद की अनुभूति हो जाएगी। जिनवाणी एक आईना है, जिसमें स्वयं को देखकर हम स्वयं के जीवन को सम्हालें-संवारें। यह संदेश श्रीऋषभदेव मंदिर सदरबाजार में चल रहे प्रवचन के दौरान साध्‍वी शुभंकरा ने दिया।

साध्वीश्री ने कहा कि हम क्रोध कर रहे हैं तो हमें दिखाई देता है और समझ में भी आता है। मान-माया, लोभ सब दिखाई नहीं देते किंतु वे यदा-कदा हमें समझ में अवश्य आते हैं। राग और द्वेष ही हमारे अनंत का अनुबंध करा देते हैं। इस संसार में जीवनयापन करते हुए हमें खाना-पीना, उठना-बैठना, स्नान करना आदि सब कुछ करना ही होगा, अन्यथा शरीर नहीं चलेगा। किंतु हमारा यही प्रयास सदा हो कि इन सभी नित्य कर्मों को करते हुए इनसे हम मन से जुड़े नहीं। मुझे तो ऐसा ही कपड़ा पसंद है, उस कंपनी का माल मुझे पसंद ही नहीं है।

वस्तुओं के प्रति मनुष्य की यही आसक्ति उसके अनंत का अनुबंध कराते हैं। बोलचाल में ही हम कितने कर्मबंध कर लेते हैं, इसका हमें भान ही नहीं रहता। जीव और जड़ के साथ हमारा लगाव या अलगाव जो भी है, वह भी सब अनंत का अनुबंध करा देते हैं।

स्पर्धा करनी ही है तो धर्म के मार्ग पर करो। इससे जीवन का उत्थान हो जाएगा। तीर्थंकर नाम का उपार्जन हम भी कर सकते हैं, केवल जिनेश्वर प्रभु के प्रति समर्पण और भावों की उच्चता चाहिए। हमें अनंत के अनुबंध से बचना है। उदाहरण के रूप में जब हम रेल या बस से यात्रा करते हैं तो मार्ग में हमें बहुत सुहावने और कभी-कभी विभत्य दृश्य भी दिखाई देते हैं किन्तु हम उनमें से किसी भी दृश्य से जुड़ते नहीं हैं क्योंकि उन दृश्यों के साथ हमारा राग-द्वेष नहीं है। लेकिन वाटरपार्क के पानी में क्रीड़ा करके हम बहुत आनंदित होते हैं, क्योंकि वहां हमारा राग जुड़ा हुआ है, वहां आपने पैसे खर्च किए हैं।

Posted By: Kadir Khan

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