Mutual Fund investment Know what is Mutual Funds Share Market

Mutual Funds: कम रिस्क में अच्छे मुनाफे के लिए म्यूचुअल फंड निवेश का एक बेहतरीन विकल्प है. इस समय बाजार में निवेश के तमाम विकल्पों में से म्यूचुअल फंड्स ही अच्छा और टिकाऊ रिटर्न दे रहे हैं. यही वजह है कि बड़ी तादाद में निवेशक म्यूचुअल फंड की तरफ आकर्षित हो रहे हैं. खासकर सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिये इसमें निवेश करने वालों की तादाद लगातार बढ़ रही है. क्योंकि जिन लोगों को बाजार की कम जानकारी है उनके लिए म्यूचुअल फंड एक सुरक्षित विकल्प है.

म्यूचुअल फंड के जरिये ना सिर्फ शेयर बाजारे में, बल्कि डेट, गोल्ड और कमोडिटी में भी अपना पैसा निवेश कर सकते हैं. म्यूचुअल फंड में निवेश की कई विकल्प बाजार में मौजूद हैं. बेहतर होगा कि किसी एक्सपर्ट की मदद से म्यूचुअल फंड में निवेश करना चाहिए. क्योंकि सही जानकारी के आभाव में आपको वह रिजल्ट नहीं मिलेगा, जिसकी आप उम्मीद करते हैं.

इस लेख के माध्यम से हम म्यूचुअल फंड में निवेश के विभिन्न विकल्पों के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे, जिनकी मदद से आप अपने लक्ष्यों और निवेश की अवधि को ध्यान में रखते हुए निवेश का विकल्प चुन सकते हैं.

म्यूचुअल फंड (Mutual fund)
हिंदी में म्यूचुअल फंड को पारस्परिक निधि कहते हैं. यह एक प्रकार का सामुहिक निवेश होता है. निवेशकों के समूह मिल कर स्टॉक, शॉर्ट टर्म के निवेश या अन्य सिक्युरिटीज मे निवेश करते है. म्यूचुअल फंड मे एक फंड मैनेजर होता है जो फंड के निवेशों को निर्धारित करता है और नफा-नुकसान का हिसाब रखता है. इस प्रकार हुए नफा-नुकसान को निवेशकों में बांट दिया जाता है.

म्यूचुअल फंड कंपनी सभी निवेशकों के निवेश राशि को लेकर इकट्ठे करती है. इसके बदले कंपनी कुछ सर्विस चार्ज लेती है. म्यूचुअल फंड कंपनी इकट्ठा की गई राशि को बाजार में निवेश करती है.

म्यूचुअल फंड में निवेश करने का फायदा यह है कि आपको यह सोचने की जरूरत नहीं होती कि आप कब शेयर खरीदें या बेचें, क्योंकि यह काम फंड मैनेजर करता है.

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म्यूचुअल फंड में निवेश का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप इसमें महज 500 रुपये महीना तक निवेश कर सकते हैं. मासिक निवेश के लिए सिस्टेमेटिक इनवेस्टमेंट प्लान लेना होता है. इसमें एक तय राशि हर महीने आपके बैंक खाते से सीधे फंड में ट्रांसफर होती रहती है.

यूटीआई एएमसी भारत की सबसे पुरानी म्यूचुअल फंड कंपनी है.

म्यूचुअल फंड की इक्विटी योजना में इंडेक्स फंड, डायवर्सिफाइड फंड, लार्ज-कैप फंड, मिड-कैप स्कीम और टैक्स सेविंग स्कीम जैसे कई विकल्प होते हैं. आप अपने टारगेट के हिसाब से कोई भी विकल्प चुन सकते हैं.

म्यूचुअल फंड में निवेश करते समय एक बात हमेशा ध्यान रखें कि म्यूचुअल फंड में लंबे समय के निवेश से ही आप अपने टारगेट को हासिल कर सकते हैं. सही रिटर्न के लिए आपको कम से कम 6-7 निवेश करना होगा. दो-चार साल के निवेश से निवेशकों को कोई खास फायदा नहीं होता है.

म्यूचुअल फंड के प्रकार (Types of Mutual Funds)
म्यूचुअल फंड को हम एसेट्स ( Asset Class) और संरचना यानी स्ट्रैक्चर (structure) के आधार पर दो हिस्सों में बांट सकते हैं.

एसेट्स के आधार पर म्यूचुअल फंड
इस प्रकार के म्यूचुअल फंड में किसी एक या एक से अधिक प्रकार की सम्पत्तियों में निवेश किया जाता है. यानी जो पैसा आपने म्यूचुअल फंड में जमा किया है उसे किसी एक या एक से अधिक जगह निवेश किया जाता है.

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एसेट क्लास के आधार पर भी म्यूचु्अल फंड को हम कई हिस्सों में बांट सकते हैं-

डेट फंड (Debts Funds)
डेट फंड ऐसे फंड होते हैं जो एक निश्चित इनकम रिटर्न देते हैं. डेट फंड कमर्शियल पेपर, ट्रेजरी बिल, कॉर्पोरेट बांड्स और अन्य कई मनी मार्केट इंस्ट्रूमेंट में निवेश करते हैं.

गिल्ट फंड (Gilt Fund)
गिल्ट फंड अपना पैसा सिर्फ गवर्नमेंट सिक्योरिटीज में ही निवेश करते हैं. सरकार को पैसा देने की वजह से इस प्रकार के डेब्ट फंड में रिस्क नहीं की मात्रा में होता है.

लिक्विड फंड्स (Liquid Funds)
लिक्विड फंड वे म्यूचुअल फंड होते हैं जो किसी भी समय रीडीम करवाए जा सकते हैं. रिडेम्पशन का आवेदन करने के 24 घंटे के भीतर पैसा आपके बैंक अकाउंट में आ जाता है. लिक्विड फंड, डेट फंड की केटेगरी में सबसे कम रिटर्न देता है परंतु यह सुरक्षित भी अधिक होता है.

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लिक्विड फंड में आप कम से कम 3 दिन के लिए भी इन्वेस्ट कर सकते हैं. लिक्विड फंड्स जिन सिक्योरिटीज में निवेश करते हैं उनकी मैच्योरिटी 91 दिन तक की होती है. लिक्विड फंड सेविंग अकाउंट और बैंक एफडी का सबसे अच्छा विकल्प है.

इक्विटी फंड (Equity Funds)
इक्विटी फंड, म्यूचुअल फंड में सबसे पॉपुलर फंड है. इक्विटी फंड में लोग ज्यादा रिस्क लेकर ज्यादा रिटर्न के लिए इन्वेस्ट करते हैं. इक्विटी म्यूचुअल फंड में फंड मैनेजर पूरा निवेश स्टॉक मार्केट में करता है.

इक्विटी म्यूचुअल फंड को लार्ज कैपिटल, मिड कैपिटल, मल्टी कैपिटल और स्मॉल कैपिटल फंड में बांटा गया है.

लार्ज कैप फंड्स (Large Cap Funds)
लार्ज कैप फंड वे म्यूचुअल फंड्स होते हैं जो अपना पैसा बड़े मार्केट कैपिटल वाली कंपनी में लगाते हैं. लार्ज कैप कंपनी पहले से अपनी ग्रोथ प्राप्त कर चुकी होती है. इसलिए यहां रिटर्न कुछ कम मिलते हैं परंतु रिटर्न लगातार मिलता है. लार्ज कैप फंड में स्माल एंड मिडकैप की जगह कम रिस्क होता है.

मिड कैप फंड्स (Mid Cap Funds)
मिड कैप वाली कंपनी मध्यम श्रेणी की कंपनी होती हैं. ये वे कंपनियां होती हैं जिन्होंने अपने व्यापार को स्थापित कर लिया है और अब तरक्की की ओर बढ़ रही हैं. मिड कैप फंड लार्ज कैप फंड की तुलना में ज्यादा रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं.

स्मॉल कैप फंड्स (Small Cap Funds)
स्मॉल कैपिटल फंड वाली कंपनियां मार्केट में नए कारोबार के साथ अपने-आप को स्थापित करने का प्रयास करती हैं. इनमें रिटर्न अच्छा मिलता है परंतु उसी हिसाब से रिस्की भी ज्यादा होता है.

मल्टी कैप फंड्स (Multi Cap Funds)
म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए यह कैटेगरी बहुत ही पॉपुलर है. इस फंड में लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप कंपनियों में एक तय रेश्यो में निवेश किया जाता है.

इनके अलावा फ्लैक्सी कैप फंड्स (Flexi Cap Funds), इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS) और हाईब्रिड फंड्स (Hybrid Funds) आदि भी होते हैं.

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