PhD Not Mandatory for Assistant Professor post said Education Minister Dharmendra Pradhan

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Union Education Minister Dharmendra Pradhan) ने असिस्टेंट प्रोफेसर (Assistant Professor) पद के लिए पोस्टडॉक्टोरल या पीएचडी डिग्री (Postdoctoral or Ph.D) को लेकर बड़ा ऐलान किया है। मंत्री ने कहा है कि असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए पीएचडी अनिवार्य नहीं है। उन्होंने  कहा, विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर भर्तियों के लिए पीएचडी  की अनिवार्यता समाप्त कर दी गई है। अब बिना पीएचडी किए छात्र भी इस पद के लिए आवेदन कर सकते हैं।

बता दें, कोरोनावायरस महामारी के कारण इस साल राहत दी गई है. क्योंकि  दो साल से कोविड-19 के कारण स्टूडेंट्स की पीएचडी पूरी नहीं हो पाई है। शिक्षा मंत्री ने कहा, पहले भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों में सहायक प्रोफेसर पद पर भर्ती के लिए पीएचडी अनिवार्य कर दी गई थी। अब तक, इस मानदंड को शिक्षा मंत्रालय द्वारा हटा दिया गया है ताकि रिक्त पदों को समय पर भरा जा सके और  फैकल्टी/ प्रोफेसरों की संभावित कमी के कारण शिक्षा प्रभावित न हो।

बता दें, पहले नेशनल एलिजिबिलिटी टेस्ट (NET) कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में असिस्टेंट प्रोफेसर की भर्ती के लिए एक महत्वपूर्ण मानदंड हुआ करता था।   साल 2018 में, सरकार ने कहा था कि असिस्टेंट प्रोफेसर पदों पर नियुक्त होने के लिए उम्मीदवारों को पीएचडी की आवश्यकता होगी और भर्ती के लिए केवल नेट ही मानदंड नहीं होगा। यह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और अन्य शैक्षणिक कर्मचारियों की नियुक्ति के लिए न्यूनतम योग्यता और उच्च शिक्षा में मानकों के रखरखाव के लिए अन्य उपाय) विनियम, 2018 के तहत घोषित किया गया था।

बता दें, उम्मीदवारों को अपनी पीएचडी पूरी करने के लिए तीन साल का समय दिया था। सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को 2021-22 शैक्षणिक सत्र से भर्ती के दौरान इस पर विचार करना शुरू करने को कहा। हालांकि, महामारी की स्थिति के कारण, कई उम्मीदवार अपनी पीएचडी पूरी नहीं कर सके और सरकार से इसमें इस साल छूट देने की अपील कर रहे थे।

बुधवार को मीडिया से बात करते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा, “सरकार ने इस साल के लिए असिस्टेंट प्रोफेसरों के पद के लिए अनिवार्य पीएचडी की आवश्यकता को रोकने का फैसला किया है। हमें ऐसे उम्मीदवारों से बहुत सारे अनुरोध प्राप्त हो रहे थे जो पद के लिए आवेदन करना चाहते थे लेकिन पीएचडी की आवश्यकता को पूरा करने में असमर्थ थे।

इसका मतलब है, पोस्ट-ग्रेजुएशन कर चुके छात्र और NET परीक्षा में सफल हो चुके छात्र असिस्टेंट प्रोफेसर के पद पर आवेदन कर सकते हैं। मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यूजीसी जल्द ही इस फैसले को लेकर सभी उच्च शिक्षा संस्थानों को एक सर्कुलर जारी करेगा। यह कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की सभी रिक्त सीटों को शीघ्र भरने के लिए मदद करेगा।”

इससे पहले सितंबर में प्रधान ने सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों से कहा था कि अक्टूबर के अंत तक 6000- ऑड टीचिंग भर्ती को “मिशन मोड” में भरें। जिसके बाद राजस्थान यूनिवर्सिटी, दिल्ली यूनिवर्सिटी और पंजाब यूनिवर्सिटी समेत कई यूनिवर्सिटीज ने कई पदों के लिए विज्ञापन जारी किए हैं।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान कहा,   ‘नीति को लागू करने की योजना को चालू वर्ष के लिए रोक दिया गया है, हालांकि इसे रद्द नहीं किया गया है. इस कदम से उच्च शिक्षा संस्थानों में रिक्त शिक्षण पदों को तेजी से भरने की भी उम्मीद है।’

वहीं देश भर के शिक्षक इस फैसले का स्वागत करते हैं। दिल्ली विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (DUTA) के सदस्य आभा देव हबीब ने कहा, “इससे विश्वविद्यालय के विभागों में तदर्थ शिक्षकों को मदद मिलेगी, जिनकी पुनर्नियुक्ति इस अनिवार्य पीएचडी खंड के कारण लंबित रखी गई थी। ” डूटा ने 15 सितंबर को यूजीसी के अधिकारियों से मुलाकात की थी और ये मु्द्दा उठाया था।