Satellite Internet of Starlink will be different from traditional internet Elon Musk can challenge market of Mukesh Ambani and Airtel

एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक भारत में ग्रामीण क्षेत्रों से सर्विस देने की शुरुआत करेगी। आइए जानते हैं कि पारंपरिक इंटरनेट से किस तरह से अलग है स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सर्विस।

दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति एलन मस्क (Elon Musk) का सैटेलाइट इंटरनेट (Satellite Internet) जल्दी ही भारत पहुंचने वाला है। इससे भारत के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी (Mukesh Ambani) की रिलायंस जियो (Reliance Jio) समेत भारती एयरटेल (Bharti Airtel) और वोडाफोन आइडिया (Vodafone Idea) के लिए चुनौती माना जा रहा है। इस चर्चा के बीच अभी हर किसी के मन में यह सवाल उठता है कि एलन मस्क का सैटेलाइट इंटरनेट पारंपरिक 4जी (4G) या आने वाले 5जी (5G) से किस तरह अलग है। हम इस खबर में इसी बात पर चर्चा करने वाले हैं।

टावर या केबल से चलता है पारंपरिक इंटरनेट

हम अभी जो पारंपरिक इंटरनेट यूज करते हैं, वह या तो मोबाइल ब्रॉडबैंड होता है या केबल इंटरनेट। मोाबइल ब्रॉडबैंड का मतलब उस इंटरनेट से हुआ, जो हम सिमकार्ड लगाकर यूज करते हैं। अभी रिलायंस जियो, भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और सरकारी कंपनी बीएसएनएल यह सर्विस दे रही है। केबल इंटरनेट में सेट टॉप बॉक्स से इंटरनेट चलता है। इस कैटेगरी में हाथवे, जियो फाइबर और एयरटेल एक्सट्रीम प्रमुख सर्विस प्रोवाइडर हैं।

टावर की कमी से होती है Mobile Internet के यूजरों को समस्या

मोबाइल इंटरनेट टावरों के सहारे चलता है। इसके चलते दूर-दराज के क्षेत्रों में नेटवर्क की दिक्कत हो जाती है, जहां टावर नहीं होते हैं। कई शहरी इलाकों में भी टावर की कमी के चलते नेटवर्क की समस्या आती है। ऐसे में मोबाइल इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाना मुश्किल हो जाता है। केबल इंटरनेट के साथ समस्या उपलब्धता की समस्या है। गुणवत्ता वाला केबल इंटरनेट शहरों तक सीमित है।

सैटेलाइट से इंटरनेट देती है Elon Musk की Starlink

इसकी तुलना में एलन मस्क की कंपनी स्टारलिंक की सर्विस को देखते हैं। स्टारलिंक सैटेलाइट से इंटरनेट सर्विस देती है। ये सैटेलाइट लो-ऑर्बिट में लगातार चक्कर लगाते रहते हैं, अत: यह दुनिया के हर हिस्से में नेटवर्क उपलब्ध करा सकते हैं। यह न सिर्फ जमीन पर बल्कि समुद्र से लेकर हवाई यात्रा तक में बिना रुकावट के नेटवर्क उपलब्ध करा सकता है। इस मामले में यह पारंपरिक इंटरनेट सर्विस की तुलना में बीस हो जाता है।

Starlink की 42 हजार सैटेलाइट छोड़ने की तैयारी

मस्क की दूसरी कंपनी स्पेसएक्स अभी तक करीब दो हजार छोटे सैटेलाइट लांच कर चुकी है। सूटकेस के आकार के ये सैटेलाइट पृथ्वी के लो-ऑर्बिट में चक्कर लगा रहे हैं। स्टारलिंक आने वाले समय में ऐसे 42 हजार सैटेलाइट ऑर्बिट में छोड़ने की तैयारी में है। कंपनी का कहना है कि बीटा फेज में वह 50 से 150 एमबीपीएस स्पीड का इंटरनेट प्रोवाइड करेगी।

स्पीड को आधार बनाकर देखा जाए तो शहरी इलाकों में एलन मस्क की कंपनी के लिए गुंजाइश कम है। शहरी इलाकों में पहले से ही इससे बेहतर स्पीड की केबल इंटरनेट सर्विस उपलब्ध है। ग्रामीण इलाकों में, जहां नेटवर्क की समस्या है और केबल इंटरनेट नहीं पहुंच पाया है, वहां स्टारलिंक के लिए काफी गुंजाइश है। संभवत: यही कारण है कि भारत में स्टारलिंक ग्रामीण इलाकों पर फोकस कर रही है।

ग्रामीण लोकसभा क्षेत्रों से शुरुआत करेगी Starlink

स्टारलिंक की भारतीय इकाई के प्रमुख बनाए गए संजय भार्गव ने रविवार को कहा भी कि उनकी कंपनी शुरुआत में 10 ग्रामीण लोकसभा क्षेत्रों पर ध्यान देगी। हालांकि भार्गव ने अभी यह नहीं बताया कि वे 10 ग्रामीण लोकसभा क्षेत्र कौन से होंगे।

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5जी से मुश्किल हो सकती हैं Elon Musk के लिए भारत की राहें

बहरहाल, स्टारलिंक की सर्विस, टेक्नोलॉजी और योजना को देखकर विशेषज्ञ इसे रिलायंस जियो, एयरटेल और वोडाफोन आइडिया की मोबाइल ब्रॉडबैंड सर्विस के लिए चुनौती मान रहे हैं। यदि स्टारलिंक आने वाले समय में सस्ते प्लान पर बेहतर स्पीड वाली सर्विस प्रोवाइड करती है, तब इससे केबल इंटरनेट प्रोवाइडर को भी खतरा हो सकता है। हालांकि 5जी के आने से मोबाइल ब्रॉडबैंड की स्पीड व नेटवर्क में कई गुना सुधार होने की उम्मीद की जा रही है।