Sports: Khela India Khelo: Tenacity In The Furnace Of Supremacy And Better, Boxers And Coaches Sweating For Gold – खेलकूद : खेला इंडिया खेलो : वर्चस्व और बेहतर की भट्ठी में तप, सोने के लिए पसीना बहा रहे बॉक्सर और कोच

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पंचकूला। खेलो इंडिया 2022 जिले के खिलाड़ियों के लिए खास होने वाला है। यह गेम्स सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण पंचकूला के छह बॉक्सरों और उनके कोच के लिए होने वाला है। इस बार घरेलू मैदान में खेलने का उनको मौका जरूर मिलेगा। इस बार इनके सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ जहां वर्चस्व को बनाए रखना है, वहीं बेहतर करने की कोशिश में खिलाड़ी जमकर पसीना बहा रहे हैं। सबसे ज्यादा पंचकूला से खेलो इंडिया में भागीदारी बॉक्सिंग की है। ऐसे में सर्दी में भी बॉक्सरों के पसीने खेल के मैदान में छूटने वाले हैं। इसकी तैयारी में स्थानीय बॉक्सर जुटे हैं।
बता दें कि 4 फरवरी 2022 से पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में खेलो इंडिया गेम्स 2022 के अधिकतर गेम्स खेले जाएंगे। जिसमें बॉक्सिंग भी शामिल है। खेलो इंडिया गेम्स में 18 साल तक के करीब 10 हजार खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। प्रतियोगिताओं को व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए केंद्र ने 20 और साई ने 25 करोड़ से अधिक का बजट तय किया है। इसके अलावा, हरियाणा सरकार भी स्टेडियम बनाने और उनको ठीक करने पर 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च कर रही है। खेल विभाग ने अलग-अलग कार्य के लिए अलग-अलग एजेंसी को काम दिया है। बता दें कि इस बार खेलों की संख्या 19 से बढ़ाकर 25 कर दी गई है। इनमें पांच भारतीय पारंपरिक खेलों को भी शामिल किया गया है।
दादी से मिली प्रेरणा बन गया बॉक्सर
बचपन में दादी के साथ ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स आने वाला विवेक दहिया का खेलो इंडिया गेम्स के लिए ओपन नेशनल में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर चयन किया गया है। इस बार विवेक अंडर-19 आयुवर्ग के बॉक्सिंग में 86 से 92 भारवर्ग में खेलेगा। दादी ही उसे बॉक्सिंग कोच से बात कर प्रैक्टिस के लिए लाने लगी। जब स्टेट चैंपियनशिप में विवेक ने स्वर्ण पदक जीता तब घर के सभी सदस्यों को पता चला। उसके बाद से विवेक ने बॉक्सिंग में ही अपना करियर बनाने का फैसला लिया। चार साल के खेल करियर में विवेक स्टेट में तीन बार स्वर्ण और एक बार कांस्य पदक जीत चुका है। एक बार नेशनल में ब्रांज मेडल भी हासिल कर चुका है। विवेक चंडीगढ़ स्थित द ब्रिटिश पब्लिक स्कूल में 12वीं का छात्र है।
पिता डॉक्टर बेटा ने चुना बॉक्सिंग में कॅरियर
लगातार स्टेट में छह बार और नेशनल में एक बार गोल्डन पंच लगाने वाले रूद्र को खेलो इंडिया गेम्स के लिए चुना गया है। रूद्र ने तीन साल के अथक प्रयास के बाद पहली बार में ही नेशनल में बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया था। इसके अलावा नेशनल में रूद्र एक बार सिल्वर और एक बार कांस्य मेडल भी जीत चुका है। उसके पिता से उसे बॉक्सिंग की प्रेरणा मिली है। रूद्र के पिता विरेंद्र डांगी बॉक्सिंग कोच हैं। रूद्र चंडीगढ़ एसडी स्कूल में प्लस वन का छात्र है। इस बार उसे क्वार्टर फाइनल में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर खेलो इंडिया गेम्स के लिए चुना गया है। रूद्र पंचकूला सेक्टर-11 में रहता है।
तीन बार की विजेता प्रांजल गोल्डन पंच लगाने को तैयार
पंचकूला सेक्टर-26 निवासी प्रांजल लगातार तीन बार खेलो इंडिया पदक विजेता रह चुकी है। इस बार पांचवीं बार खेलो इंडिया के लिए प्रांजल बॉक्सिंग रिंग में दमखम दिखाने को तैयार है। इसके अलावा प्रांजल नेशनल में लगातार 2017 से चैंपियन का खिताब जीतते आ रही है। अभी अगस्त 2021 में प्रांजल दुबई में आयोजित एशियन यूथ एंड जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर लौटी है। यह खिताब प्रांजल ने 4-1 से जीता था। प्रांजल अंडर-17 आयुवर्ग में 70 से 75 भार वर्ग में खेलती है। प्रांजल के कोच वीरेंद्र डांगी ने बताया कि वह खेलो इंडिया के साथ-साथ ओलंपिक की तैयारी में अभी से जुट गई है।
पिता डॉक्टर, बेटा बॉक्सिंग में आजमा रहा हाथ
तीन साल के प्रयास के बाद भव्य सैनी का खेलो इंडिया गेम्स के लिए चयन हुआ है। स्टेट चैंपियनशिप में दो बार स्वर्ण पदक विजेता भव्य ने बताया कि उनके पिता पेशे से एक डॉक्टर हैं, लेकिन उन्हें बॉक्सिंग में कॅरियर बनाना है। भव्य ने बताया कि उनके पिता धीरज सैनी के दोस्त एक बॉक्सर हैं, उन्होंने ने ही उन्हें बॉक्सिंग के लिए सलाह दी थी। तब से ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में वह बॉक्सिंग की ट्रेनिंग कोच वीरेंद्र डांगी के पास करने लगा। पहले दिन से ही भव्य को बॉक्सिंग रिंग में मजा आने लगा। वह 14 आयुवर्ग के 70 से 75 वेट कैटेगरी में खेलता है। सिक्कम के खिलाड़ी को हराने के बाद उसका चयन खेलो इंडिया के लिए किया गया।
कोच से मिली प्रेरणा, बॉक्सिंग में चुना कॅरियर
नेशनल में कांस्य पदक के आधार पर खेलो इंडिया गेम्स में चयनित महक मोर ने बताया कि पहले वह फेंसिंग की प्रैक्टिस करती थी, लेकिन बॉक्सिंग उसे ज्यादा अच्छा लगता था। इसके बाद कोच वीरेंद्र डांगी से मिली और वह बॉक्सिंग का गुर सीखाने लगे। महक ने बताया कि वह बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। उसने दो साल के प्रयास के बाद स्टेट में एक बार स्वर्ण और नेशनल में जीत हासिल की है। इस बार उसका लक्ष्य है कि वह 18 आयुवर्ग के 80 प्लस वेट कैटेगरी में खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण पदक जीते। वह पंचकूला सेक्टर-21 में रहती है।
इंस्पेक्टर की बेटी लगाएगी गोल्डन पंच
नेशनल में तीन बार पदक विजेता रचिता का खेलो इंडिया गेम्स में चयन किया गया है। वह खेलो इंडिया की तैयारी में जुटी है। उसके पिता सुुरेंद्र डुडी पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। रचिता ने बताया कि खेलो इंडिया की तैयारी के लिए रोजाना पांच घंटे बॉक्सिंग रिंग में बीता रही है। पिछली बार भी वह खेलो इंडिया की पदक विजेता है। दूसरी बार वह खेलो इंडिया में बॉक्सिंग पंच लगाएगी। रचिता ने बताया कि उसको उसके पिता से बॉक्सिंग की प्रेरणा मिली है। उसके पिता बॉक्सर थे।
घरेलू मैदान में बच्चों के रिजल्ट रहेंगे महत्वपूर्ण
खेलो इंडिया में चुने बच्चों को फरवरी में आयोजित खेलो इंडिया 2022 के लिए तैयार कर रहा हूं। जो भी बच्चे गोल्ड और सिल्वर के लिए चुने जाएंगे, साई की ओर से उनको पांच लाख रुपये स्कॉलरशिप दी जाएगी। रोजाना बच्चों को सुबह दो घंटे और शाम को तीन घंटे प्रैक्टिस करवा रहा हूं। साथ ही दोपहर का सेशन बच्चे घर पर ही एक घंटे का करते हैं। इनका शेड्यूल तैयार कर दे दिया गया है, बच्चे उसके मुताबिक प्रैक्टिस कर रहे हैं। इस समय बॉक्सिंग देश के टॉप फाइव गेमों में शामिल है। हरियाणा का सबसे पसंदीदा खेल भी है। खेलो इंडिया में चुने जाने के बाद बच्चों को इंडिया कैंप के लिए भेजा जाएगा। जहां उन्हें वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए तैयार किया जाता है। खेला इंडिया गेम्स पहली बार पंचकूला में हो रहा है, तो इस कारण बच्चों के रिजल्ट बहुत महत्वपूर्ण रहेंगे। – विरेंद्र डांगी, बॉक्सिंग कोच

पंचकूला। खेलो इंडिया 2022 जिले के खिलाड़ियों के लिए खास होने वाला है। यह गेम्स सबसे ज्यादा चुनौतीपूर्ण पंचकूला के छह बॉक्सरों और उनके कोच के लिए होने वाला है। इस बार घरेलू मैदान में खेलने का उनको मौका जरूर मिलेगा। इस बार इनके सामने दोहरी चुनौती है। एक तरफ जहां वर्चस्व को बनाए रखना है, वहीं बेहतर करने की कोशिश में खिलाड़ी जमकर पसीना बहा रहे हैं। सबसे ज्यादा पंचकूला से खेलो इंडिया में भागीदारी बॉक्सिंग की है। ऐसे में सर्दी में भी बॉक्सरों के पसीने खेल के मैदान में छूटने वाले हैं। इसकी तैयारी में स्थानीय बॉक्सर जुटे हैं।

बता दें कि 4 फरवरी 2022 से पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में खेलो इंडिया गेम्स 2022 के अधिकतर गेम्स खेले जाएंगे। जिसमें बॉक्सिंग भी शामिल है। खेलो इंडिया गेम्स में 18 साल तक के करीब 10 हजार खिलाड़ी हिस्सा लेंगे। प्रतियोगिताओं को व्यवस्थित तरीके से कराने के लिए केंद्र ने 20 और साई ने 25 करोड़ से अधिक का बजट तय किया है। इसके अलावा, हरियाणा सरकार भी स्टेडियम बनाने और उनको ठीक करने पर 50 करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च कर रही है। खेल विभाग ने अलग-अलग कार्य के लिए अलग-अलग एजेंसी को काम दिया है। बता दें कि इस बार खेलों की संख्या 19 से बढ़ाकर 25 कर दी गई है। इनमें पांच भारतीय पारंपरिक खेलों को भी शामिल किया गया है।

दादी से मिली प्रेरणा बन गया बॉक्सर

बचपन में दादी के साथ ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स आने वाला विवेक दहिया का खेलो इंडिया गेम्स के लिए ओपन नेशनल में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर चयन किया गया है। इस बार विवेक अंडर-19 आयुवर्ग के बॉक्सिंग में 86 से 92 भारवर्ग में खेलेगा। दादी ही उसे बॉक्सिंग कोच से बात कर प्रैक्टिस के लिए लाने लगी। जब स्टेट चैंपियनशिप में विवेक ने स्वर्ण पदक जीता तब घर के सभी सदस्यों को पता चला। उसके बाद से विवेक ने बॉक्सिंग में ही अपना करियर बनाने का फैसला लिया। चार साल के खेल करियर में विवेक स्टेट में तीन बार स्वर्ण और एक बार कांस्य पदक जीत चुका है। एक बार नेशनल में ब्रांज मेडल भी हासिल कर चुका है। विवेक चंडीगढ़ स्थित द ब्रिटिश पब्लिक स्कूल में 12वीं का छात्र है।

पिता डॉक्टर बेटा ने चुना बॉक्सिंग में कॅरियर

लगातार स्टेट में छह बार और नेशनल में एक बार गोल्डन पंच लगाने वाले रूद्र को खेलो इंडिया गेम्स के लिए चुना गया है। रूद्र ने तीन साल के अथक प्रयास के बाद पहली बार में ही नेशनल में बॉक्सिंग में स्वर्ण पदक पर कब्जा कर लिया था। इसके अलावा नेशनल में रूद्र एक बार सिल्वर और एक बार कांस्य मेडल भी जीत चुका है। उसके पिता से उसे बॉक्सिंग की प्रेरणा मिली है। रूद्र के पिता विरेंद्र डांगी बॉक्सिंग कोच हैं। रूद्र चंडीगढ़ एसडी स्कूल में प्लस वन का छात्र है। इस बार उसे क्वार्टर फाइनल में बेहतर प्रदर्शन के आधार पर खेलो इंडिया गेम्स के लिए चुना गया है। रूद्र पंचकूला सेक्टर-11 में रहता है।

तीन बार की विजेता प्रांजल गोल्डन पंच लगाने को तैयार

पंचकूला सेक्टर-26 निवासी प्रांजल लगातार तीन बार खेलो इंडिया पदक विजेता रह चुकी है। इस बार पांचवीं बार खेलो इंडिया के लिए प्रांजल बॉक्सिंग रिंग में दमखम दिखाने को तैयार है। इसके अलावा प्रांजल नेशनल में लगातार 2017 से चैंपियन का खिताब जीतते आ रही है। अभी अगस्त 2021 में प्रांजल दुबई में आयोजित एशियन यूथ एंड जूनियर बॉक्सिंग चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर लौटी है। यह खिताब प्रांजल ने 4-1 से जीता था। प्रांजल अंडर-17 आयुवर्ग में 70 से 75 भार वर्ग में खेलती है। प्रांजल के कोच वीरेंद्र डांगी ने बताया कि वह खेलो इंडिया के साथ-साथ ओलंपिक की तैयारी में अभी से जुट गई है।

पिता डॉक्टर, बेटा बॉक्सिंग में आजमा रहा हाथ

तीन साल के प्रयास के बाद भव्य सैनी का खेलो इंडिया गेम्स के लिए चयन हुआ है। स्टेट चैंपियनशिप में दो बार स्वर्ण पदक विजेता भव्य ने बताया कि उनके पिता पेशे से एक डॉक्टर हैं, लेकिन उन्हें बॉक्सिंग में कॅरियर बनाना है। भव्य ने बताया कि उनके पिता धीरज सैनी के दोस्त एक बॉक्सर हैं, उन्होंने ने ही उन्हें बॉक्सिंग के लिए सलाह दी थी। तब से ताऊ देवी लाल स्पोर्ट्स कांप्लेक्स में वह बॉक्सिंग की ट्रेनिंग कोच वीरेंद्र डांगी के पास करने लगा। पहले दिन से ही भव्य को बॉक्सिंग रिंग में मजा आने लगा। वह 14 आयुवर्ग के 70 से 75 वेट कैटेगरी में खेलता है। सिक्कम के खिलाड़ी को हराने के बाद उसका चयन खेलो इंडिया के लिए किया गया।

कोच से मिली प्रेरणा, बॉक्सिंग में चुना कॅरियर

नेशनल में कांस्य पदक के आधार पर खेलो इंडिया गेम्स में चयनित महक मोर ने बताया कि पहले वह फेंसिंग की प्रैक्टिस करती थी, लेकिन बॉक्सिंग उसे ज्यादा अच्छा लगता था। इसके बाद कोच वीरेंद्र डांगी से मिली और वह बॉक्सिंग का गुर सीखाने लगे। महक ने बताया कि वह बीए प्रथम वर्ष की छात्रा है। उसने दो साल के प्रयास के बाद स्टेट में एक बार स्वर्ण और नेशनल में जीत हासिल की है। इस बार उसका लक्ष्य है कि वह 18 आयुवर्ग के 80 प्लस वेट कैटेगरी में खेलो इंडिया गेम्स में स्वर्ण पदक जीते। वह पंचकूला सेक्टर-21 में रहती है।

इंस्पेक्टर की बेटी लगाएगी गोल्डन पंच

नेशनल में तीन बार पदक विजेता रचिता का खेलो इंडिया गेम्स में चयन किया गया है। वह खेलो इंडिया की तैयारी में जुटी है। उसके पिता सुुरेंद्र डुडी पुलिस विभाग में इंस्पेक्टर के पद पर तैनात हैं। रचिता ने बताया कि खेलो इंडिया की तैयारी के लिए रोजाना पांच घंटे बॉक्सिंग रिंग में बीता रही है। पिछली बार भी वह खेलो इंडिया की पदक विजेता है। दूसरी बार वह खेलो इंडिया में बॉक्सिंग पंच लगाएगी। रचिता ने बताया कि उसको उसके पिता से बॉक्सिंग की प्रेरणा मिली है। उसके पिता बॉक्सर थे।

घरेलू मैदान में बच्चों के रिजल्ट रहेंगे महत्वपूर्ण

खेलो इंडिया में चुने बच्चों को फरवरी में आयोजित खेलो इंडिया 2022 के लिए तैयार कर रहा हूं। जो भी बच्चे गोल्ड और सिल्वर के लिए चुने जाएंगे, साई की ओर से उनको पांच लाख रुपये स्कॉलरशिप दी जाएगी। रोजाना बच्चों को सुबह दो घंटे और शाम को तीन घंटे प्रैक्टिस करवा रहा हूं। साथ ही दोपहर का सेशन बच्चे घर पर ही एक घंटे का करते हैं। इनका शेड्यूल तैयार कर दे दिया गया है, बच्चे उसके मुताबिक प्रैक्टिस कर रहे हैं। इस समय बॉक्सिंग देश के टॉप फाइव गेमों में शामिल है। हरियाणा का सबसे पसंदीदा खेल भी है। खेलो इंडिया में चुने जाने के बाद बच्चों को इंडिया कैंप के लिए भेजा जाएगा। जहां उन्हें वर्ल्ड चैंपियनशिप के लिए तैयार किया जाता है। खेला इंडिया गेम्स पहली बार पंचकूला में हो रहा है, तो इस कारण बच्चों के रिजल्ट बहुत महत्वपूर्ण रहेंगे। – विरेंद्र डांगी, बॉक्सिंग कोच