Taking lessons from the Corona crisis, the team of ‘Business Women’ is being prepared for socio-economic prosperity | कोरोना संकट से सबक लेते हुए सामाजिक-आर्थिक समृद्धि के लिए तैयार की जा रही ‘बिजनेस वूमेन’ टीम

गुड़गांव11 मिनट पहले

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'मेधाश्रे' की संस्थापिका सीमा सिंह ने कहा, संकट अभी टला नहीं है। - Dainik Bhaskar

‘मेधाश्रे’ की संस्थापिका सीमा सिंह ने कहा, संकट अभी टला नहीं है।

  • इन दिनों महिलाओें को स्वरोजगार के लिए प्रेरित कर रही हैं सीमा सिंह

पिछले दिनों कोरोना संकट में बड़े पैमाने पर युवा बेरोजगार हुए है, जिसका सीधा असर महिला शक्ति पर पड़ा है। बेरोजगारी और महंगाई के इस दौर में गृहणियों के लिए अपना घर चलाना कठिन हो रहा है। ऐसे में इन दिनों सामाजिक संगठन ‘बिजनेस वूमेन’ की टीम तैयार करने पर जोर दे रही हैं।

महिलाओं को समृद्धि की ओर बढ़ाने में मदद कर रहीं बिजनेस वूमेन सीमा सिंह ने एक कार्यक्रम में बताया कि कोविड काल समाज व देश के लिए चुनौती का रहा। जिस प्रकार समाज के कमजोर वर्गों ने आर्थिक संकट के तौर पर सामना किया वह अभूतपूर्व रहा। इस संकट का सबसे गहरा असर महिलाओं पर पड़ा है। काम-धंधा बंद होने से लाखों परिवारों के लिए भोजन की समस्या खड़ी हो गई थी। इस दौरान उनकी संस्था ने जरूरी खाने-पीने की सामग्री, जरूरतमंदों को आर्थिक मदद, दवाई, मास्क, हैंड सैनिटाइजर व एनर्जी ड्रिंक आदि देकर मदद की। महिलाओं को आर्थिक तौर पर सक्षम बनाने के लिए कौशल प्रशिक्षण प्रबंधन के साथ ही घरेलू उद्योगों को चलाने को लेकर कार्य किया।

गैर सरकारी संगठन ‘मेघाश्रे’ की संस्थापिका सीमा सिंह ने कहा कि संकट अभी टला नहीं है और कोई भी लापरवाही हमें मुश्किल में डाल सकती है। कोरोना काल के अनुभवों को देखते हुए सामाजिक-आर्थिक क्षेत्र में केंद्रित लक्ष्यों को हासिल करने की योजना बनाई है। महिलाओं के लिए छोटी व्यावसायिक इकाइयां स्थापित करने में मदद से बड़ा लक्ष्य प्राप्त होता है और इसे लेकर उनकी संस्था अग्रसर है।

उन्होंने एक ओर जहां कोरोना की तीसरी लहर को लेकर खबरदार किया है वहीं, महिलाओं का आह्वान किया है कि इस महामारी के दौर में अपने पैर पर खड़े रहने और परिवार को मजबूती प्रदान करने के लिए आर्थिक तौर पर समृद्ध बनें। मुंबई स्थित एल्केम फार्मा से जुड़ीं सीमा सिंह समाजसेवी गैर सरकारी संगठन ‘मेघाश्रे’ की संस्थापिका हैं और इस माध्यम से दो दशक से अधिक समय से महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन को लेकर काम कर रहीं हैं।

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