Taliban Government Invited The Leading Ambassadors Of Some Countries Of The World, Including China, To Dinner – अफगानिस्तान: विदेशी राजदूतों के साथ तालिबान की डिनर डिप्लोमेसी में चीन ने मांगी यह बड़ी चीज, असमंजस में मुल्ला बरादर

सार

तालिबान सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कार्यवाहक विदेश मंत्री रूमी आमिर खान मोत्तकी ने काबुल के विदेश मंत्रालय में इस वक्त अफगानिस्तान में चल रहे कुछ देशों के दूतावासों के प्रमुखों को डिनर पर आमंत्रित किया। इस दौरान काबुल में चीन, ईरान, पाकिस्तान, कतर और विश्व स्वास्थ्य संगठन समिति संयुक्त राष्ट्र के कुछ अधिकारी जो इस वक्त अफगानिस्तान के दौरे पर हैं, वह सभी लोग दूतावास में डिनर पर मौजूद रहे…

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बीती रात अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबानी सरकार ने चीन समेत दुनिया के कुछ देशों के प्रमुख राजदूतों को डिनर पर बुलाया। डिनर पर बुलाने का मकसद तालिबान का सिर्फ यही था कि उसे पूरी दुनिया में एक सरकार के तौर पर देखा जाए। इसके लिए तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री ने तमाम तरीके के ऑफर भी इन देशों के दूतावास प्रमुखों को दिए। इस डिनर डिप्लोमेसी में अफगानिस्तान में पाकिस्तान के दूतावास प्रमुख ने तालिबानी सरकार के उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर से भी मुलाकात की। इस दौरान चीन ने अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार की कमजोरी पकड़ते हुए कुछ ऐसा मांग लिया, जिसके बाद तालिबान गफलत में है, वह हां और ना दोनों ही नहीं बोल पा रहा है।

अफगानिस्तान के राजमार्गों पर नजर

तालिबान सरकार में शामिल सूत्र बताते हैं कि बीती रात को देर तक चले इस कार्यक्रम में चीन की ओर से विदेश मंत्री के सामने वहां के कुछ राजमार्गों समेत हवाई अड्डों को अपने अधीन लेने की बात कही। दरअसल चीन लगातार पाकिस्तान के ग्वादर इलाके से चीन को जोड़ने वाले अफगानिस्तान के रास्तों को बेहतर करने की बात करता है आया है। विदेशी मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एन चंद्रा कहते हैं दरअसल चीन की हमेशा से यह कोशिश रही है कि वह अफगानिस्तान के राजमार्गों को बेहतर कर पाकिस्तान के भीतर पहुंच सके और पाकिस्तानी बंदरगाहों तक अपनी मजबूत पकड़ बना ले। इस डिनर डिप्लोमेसी के दौरान चीन ने अफगानिस्तान से वह मांग लिया, जिसके लिए अगर वह मना करता है, तो चीन की ओर से मिलने वाली मदद पर अंकुश लग सकता है। और अगर हां करता है तो न सिर्फ अफगानिस्तान बल्कि पाकिस्तान की सरहदों को जोड़ने के प्रमुख रास्ते खुल जाएंगे। खुलने वाले इन रास्तों को लेकर तालिबानी सरकार का एक धड़ा शुरुआत से विरोध में है। यही वजह है कि चीन की इस मांग पर डिनर डिप्लोमेसी के दौरान तालिबान के लिए बड़ी असमंजस की स्थिति बन गई।

पाकिस्तान के समुद्री तटों तक चाहता है पहुंचना

दरअसल चीन मना कर पाने की हैसियत इस वक्त अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार में नहीं है। क्योंकि जब पूरी दुनिया ने तालिबानी सरकार को मदद रोक दी थी, तो चीन ही दुनिया का इकलौता देश रहा जिसने अफगानिस्तान की सहायता की। जिस वक्त अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में डिनर डिप्लोमेसी के माध्यम से तालिबानी सरकार के नुमाइंदे दुनिया भर के देशों से रिश्ते सुधारने की कवायद में लगे हुए थे उस वक्त भी चीन ने अपने चार जहाज के माध्यम से अफगानिस्तान में मदद भेजी। विशेषज्ञों का कहना है यह प्रेशर बनाने का एक तरीका है। जो चीन लगातार तालिबान पर बना रहा है। दरअसल चीन की नजर अफगानिस्तान की उन सभी प्राकृतिक संपदाओं पर है जो पूरी दुनिया में ऊर्जा का एक वैकल्पिक स्रोत हैं। इसके अलावा पाकिस्तान के समुद्री तटों तक पहुंचने के लिए उसके पास अफगानिस्तान को अपने खेमे में शामिल करने के अलावा दूसरा कोई रास्ता नहीं है। इसलिए वह हमेशा से मजबूत स्थिति बनाने रखने के लिए अफगानिस्तान को दाने डालता रहता है।

शुरू हों व्यापारिक गतिविधियां

तालिबान सरकार से जुड़े सूत्रों के मुताबिक कार्यवाहक विदेश मंत्री रूमी आमिर खान मोत्तकी ने काबुल के विदेश मंत्रालय में इस वक्त अफगानिस्तान में चल रहे कुछ देशों के दूतावासों के प्रमुखों को डिनर पर आमंत्रित किया। इस दौरान काबुल में चीन, ईरान, पाकिस्तान, कतर और विश्व स्वास्थ्य संगठन समिति संयुक्त राष्ट्र के कुछ अधिकारी जो इस वक्त अफगानिस्तान के दौरे पर हैं, वह सभी लोग दूतावास में डिनर पर मौजूद रहे। सूत्र बताते हैं कि इस दौरान तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर ने इन देशों के राजदूतों से अफगानिस्तान में व्यापारिक गतिविधियों को शुरू करने का आग्रह किया। हालांकि अफगानिस्तान की तालिबान सरकार ने जिन राजदूतों से व्यापारिक गतिविधियों को शुरू करने का अनुरोध किया है वह पहले से ही अफगानिस्तान को लेकर सकारात्मक रुख अख्तियार किए हुए हैं।

पूरी दुनिया में तालिबान को लेकर उसकी नकारात्मक छवि लगातार बरकरार है। यही वजह है कि ज्यादातर मुल्क अभी भी तालिबान से कोई कूटनीतिक रिश्ता नहीं रखना चाह रहे हैं। इसका अंदाजा तालिबान को भी है। यही वजह है कि वह दुनिया में अपनी नकारात्मक छवि के बावजूद भी सकारात्मक तौर पर पेश करने के नए-नए हथकंडे अपनाता रहता है। इसी कड़ी में बीती रात काबुल के विदेश मंत्रालय के मुख्यालय में डिनर डिप्लोमेसी के माध्यम से दुनिया भर के कुछ देशों को साधने की कोशिश की गई। हालांकि इस डिनर डिप्लोमेसी में पाकिस्तान और चीन के अलावा उसका कोई बड़ा हमराह उसके साथ खड़ा नजर नहीं आया।

विस्तार

बीती रात अफगानिस्तान की राजधानी काबुल में तालिबानी सरकार ने चीन समेत दुनिया के कुछ देशों के प्रमुख राजदूतों को डिनर पर बुलाया। डिनर पर बुलाने का मकसद तालिबान का सिर्फ यही था कि उसे पूरी दुनिया में एक सरकार के तौर पर देखा जाए। इसके लिए तालिबान के कार्यवाहक विदेश मंत्री ने तमाम तरीके के ऑफर भी इन देशों के दूतावास प्रमुखों को दिए। इस डिनर डिप्लोमेसी में अफगानिस्तान में पाकिस्तान के दूतावास प्रमुख ने तालिबानी सरकार के उप प्रधानमंत्री मुल्ला अब्दुल गनी बरादर से भी मुलाकात की। इस दौरान चीन ने अफगानिस्तान की तालिबानी सरकार की कमजोरी पकड़ते हुए कुछ ऐसा मांग लिया, जिसके बाद तालिबान गफलत में है, वह हां और ना दोनों ही नहीं बोल पा रहा है।

अफगानिस्तान के राजमार्गों पर नजर

तालिबान सरकार में शामिल सूत्र बताते हैं कि बीती रात को देर तक चले इस कार्यक्रम में चीन की ओर से विदेश मंत्री के सामने वहां के कुछ राजमार्गों समेत हवाई अड्डों को अपने अधीन लेने की बात कही। दरअसल चीन लगातार पाकिस्तान के ग्वादर इलाके से चीन को जोड़ने वाले अफगानिस्तान के रास्तों को बेहतर करने की बात करता है आया है। विदेशी मामलों के जानकार और दिल्ली विश्वविद्यालय के प्रोफेसर एन चंद्रा कहते हैं दरअसल चीन की हमेशा से यह कोशिश रही है कि वह अफगानिस्तान के राजमार्गों को बेहतर कर पाकिस्तान के भीतर पहुंच सके और पाकिस्तानी बंदरगाहों तक अपनी मजबूत पकड़ बना ले। इस डिनर डिप्लोमेसी के दौरान चीन ने अफगानिस्तान से वह मांग लिया, जिसके लिए अगर वह मना करता है, तो चीन की ओर से मिलने वाली मदद पर अंकुश लग सकता है। और अगर हां करता है तो न सिर्फ अफगानिस्तान बल्कि पाकिस्तान की सरहदों को जोड़ने के प्रमुख रास्ते खुल जाएंगे। खुलने वाले इन रास्तों को लेकर तालिबानी सरकार का एक धड़ा शुरुआत से विरोध में है। यही वजह है कि चीन की इस मांग पर डिनर डिप्लोमेसी के दौरान तालिबान के लिए बड़ी असमंजस की स्थिति बन गई।