Traders and processors started showing business ten

पुराने माल की डिलीवरी नई रेट से भेजने पर बढ़ रही है व्यापारिक मुश्किलें, प्रोसेसर्स के समक्ष भी खड़े हैं कई तरह के आर्थिक संकट

सूरत. एशिया की सबसे बड़ी सूरत कपड़ा मंडी में दो ही बातें टॉक ऑफ द टाउन बनी हुई है। पहली लम्बे अंतराल के बाद व्यापारिक तेजी और दूसरी तेजी के दौर में मिलों से पुराने माल की डिलीवरी बढ़ी हुई नई रेट और उस पर कड़ी व्यापारिक आपत्ति शामिल है। सोशल मीडिया पर विभिन्न मिलों के नई रेट के पत्र खूब वायरल हो रहे हैं और अब इन पर व्यापारिक संगठन भी लामबंद होने लगे हैं।
कोरोना की फस्र्ट वेव के कुछ समय थमने के दौरान भी गत वर्ष मई-जून में मिल मालिकों के जॉबचार्ज बढ़ाने का मामला खूब गरमाया था और अब एक बार फिर मिलों की नई रेट की चर्चा जोर-शोर से सूरत कपड़ा मंडी में उठ रही है। मिल मालिकों के बढ़ी हुई नई रेट के साथ माल डिलीवरी करने के पीछे बताया जा रहा है कि कोयला, कलर-केमिकल खपत के मुताबिक उपलब्ध नहीं है और उसकी दर काफी ऊंची पहुंच गई है, इसलिए ज्यादातर मिलों ने जॉबचार्ज बढ़ाकर नई रेट में माल डिलीवरी के पत्र सूरत कपड़ा मंडी के व्यापारियों को भेजे बताए हैं। उधर, एक के बाद एक कई मिलों से नई रेट के पत्र व्यापारियों को मिलने से अब वे भी लामबंद हो गए हैं और पुराने माल की डिलीवरी नई रेट से लेने पर कड़ी व्यापारिक आपत्ति जताने लगे हैं। सूरत कपड़ा मंडी में तेजी से गरमा रहे इस मामले में व्यापारिक संगठन भी लामबंद होकर समूह बैठकें करने लगे हैं।

-कपड़ा कारोबार पूरा चेन सिस्टम

मिलेनियम-2 मार्केट के कपड़ा व्यापारी किशन गाडोदिया ने बताया कि इस तरह से पुराने माल की डिलीवरी नई रेट से किए जाना पूरी तरह से गलत है। कपड़ा कारोबार पूरा चेन सिस्टम आधारित है, हर एक को जवाब देना पड़ता है। दीपावली की तैयारी में 50 फीसद से ज्यादा मिलों में पुराने माल का एक-एक करोड़ से ज्यादा मीटर ग्रे स्टॉक रहता है अब ऐसे में ट्रेडर्स कितनी आर्थिक मार सहे, यह आसानी से समझा जा सकता है।

-व्यापारिक संगठन भी जताने लगे विरोध

सूरत कपड़ा मंडी में हजारों की संख्या में ट्रेडर्स है और यह सभी छोटे-बड़े एक दर्जन व्यापारिक संगठनों से जुड़े हैं। इन संगठनों के मुताबिक माल स्टॉक करने के बाद नई रेट के पत्र जारी करना यह पूर्णतया व्यापार विरुद्ध है। सूरत मर्कंटाइल एसोसिएशन के नरेंद्र साबू ने बताया कि भाव बढ़ाने पर आपत्ति नहीं है, लेकिन माल उठाते समय कुछ और भाव और डिलीवरी के वक्त और भाव यह निष्पक्ष व्यापार की नीति नहीं है।

एजेंट-आढ़तिए भी संगठन से जुड़े

सूरत. सूरत कपड़ा मंडी के कपड़ा कारोबार की धुरी कहे जाने वाले एजेंट-आढ़तिए भी व्यापारिक मंच के नीचे आने लगे हैं। इस सिलसिले में शनिवार को सूरत मर्कंटाइल एसोसिएशन की बैठक रिंगोरड स्थित बेल्जियम स्कवेयर व जापान टैक्सटाइल मार्केट के प्रांगण में हुई। बैठक के दौरान मार्केट के दो दर्जन से ज्यादा एजेंट व आढ़तिए मौजूद थे। बैठक में एजेंट-आढ़तियों की कार्यकारिणी का भी गठन किया गया और भविष्य में एक-दूसरे के साथ मजबूती से मिलकर व्यापार में सहयोगी बनने की प्रेरणा ली गई। बैठक में नरेंद्र साबू, सुनील अग्रवाल, अशोक गोयल समेत अन्य मौजूद थे।

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