Zee Entertainment के बोर्ड ने क्यों नहीं मानी इनवेस्को की EGM डिमांड

Zee Entertainment और सोनी नेटवर्क्स के बीच प्रपोज्ड मर्जर को लेकर जारी कानूनी विवाद में एक और मोड़ आ गया है। Zee के बोर्ड ने कहा है कि कंपनी के बड़े शेयरहोल्डर्स इनवेस्को की EGM बुलाने की डिमांड वैध नहीं है। कंपनी ने स्टॉक एक्सचेंज को शुक्रवार को यह जानकारी दी।

हालांकि, नेशनल कंपनी लॉ ट्राइब्यूनल (NCLT) की मुंबई बेंच ने कंपनी को EGM बुलाने पर विचार करने का निर्देश दिया था।

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इनवेस्को की OFI Global China Fund के साथ Zee में 17.88 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इनवेस्को ने कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और CEO पुनीत गोयनका को हटाने और बोर्ड में बदलाव करने की मांग की है।

Zee ने इनवेस्को की EGM बुलाने की डिमांड 4को नहीं मानने के लिए 18 कारण बताए हैं।

मिनिस्ट्री से अनुमति

कंपनी का कहना है कि बोर्ड या CEO को बदलने से पहले मिनिस्ट्री ऑफ इनफॉर्मेशन एंड ब्रॉडकास्टिंग से मंजूरी लेने की जरूरत है। कंपनी ने कहा है कि मिनिस्ट्री की गाइडलाइंस के तहत शेयरहोल्डर्स की ओर से प्रस्तावित नियुक्ति के लिए पहले अनुमति लेनी होगी।

इसके अलावा ZEE का मानना है कि एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर को हटाने और छह नए इंडिपेंडेंट डायरेक्टर्स नियुक्त कर बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स में बड़े बदलाव करने से मार्केट रेगुलेटर SEBI के टेकओवर से जुड़े रेगुलेशंस का उल्लंघन होगा।

कंपनी ने बताया है कि शेयरहोल्डर्स बोर्ड के आधे हिस्से की नियुक्ति नॉमिनेशन एंड रेम्युनरेशन कमेटी की स्वीकृति के बिना करने का प्रपोजल दे रहे हैं जो कंपनीज एक्ट के साथ ही SEBI के नॉर्म्स का भी उल्लंघन होगा। इससे बिना ओपन ऑफर लाए कंपनी का कंट्रोल बदल जाएगा।

ZEE ने इसे कॉम्पिटिशन एक्ट का उल्लंघन बताया है।

लॉ फर्म S&R Associates के पार्टनर, सुदीप महापात्र ने कहा, “ZEE की ओर से कई संभावित कानूनी और रेगुलेटरी मुद्दे उठाए गए हैं। अगर यह कानूनी मामला खिंचता है तो अदालतों को इसका फैसला करने के लिए बहुत से जटिल बिंदुओं के साथ निपटना पड़ सकता है।”

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