Zee Entertainment Moves Bombay High Court Against Invesco Demand For Egm – जी-सोनी डील में अड़चन: इन्वेस्को की Egm बुलाने की मांग पर बॉम्बे हाईकोर्ट पहुंची जी एंटरटेनमेंट

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ‌डिंपल अलावाधी
Updated Sat, 02 Oct 2021 05:05 PM IST

सार

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment) में प्रमोटर्स की हिस्सेदारी 4.77 फीसदी है। वहीं फंड हाउसेज और अन्य निवेशकों की हिस्सेदारी 95.23 फीसदी है। 

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जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment) ने निवेशक इनवेस्को और OFI ग्लोबल चाइना फंड एलएलसी के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन दोनों कंपनियों ने जी के मैनेजिंग डायरेक्टर पुनीत गोयनका को हटाने की मांग की है। इसके अवाला उन्होंने कई मामलों पर चर्चा करने के लिए असाधारण आम बैठक (EGM) बुलाने की मांग की थी। 

पुनीत गोयनका को पद से हटाने की मांग गलत 
इस संदर्भ में जी एंटरटेनमेंट का कहना है कि पुनीत गोयनका को एमडी पद से हटाने की मांग गलत और गैर कानूनी है। मामले में स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में जी एंटरटेनमेंट ने कहा कि वह शेयरधारकों के हित में ईजीएम नहीं बुलाएगी। मामले में कंपनी ने कानूनी सलाह ली है। 

अटक सकती है सोनी पिक्चर्स के साथ डील
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में इस मामले की सुनवाई चार अक्तूबर को होगी। इस संदर्भ में कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर शेयरधारकों ने इन्वेस्को का साथ दिया, तो पुनीत गोयनका का पद से हटना तय है। ऐसे में कंपनी की सोनी पिक्चर्स के साथ डील भी अटक सकती है। मालूम हो कि अगर कोई कंपनी किसी कंपनी में 10 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी रखती है और वह ईजीएम बुलाने के लिए नोटिस देती है, तो कंपनी को तीन हफ्तों के अंदर ईजीएम बुलानी होती है। जी एंटरटेनमेंट में इन्वेस्को की करीब 18 फीसदी हिस्सेदारी है। 

इन्वेस्को का मानना था कि कंपनी का कॉर्पोरेट गवर्नेंस कमजोर है। इन्वेस्को ने ही जी एंटरटेनमेंट में दो स्वतंत्र निदेशकों और मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) पुनीत गोयनका को हटाने की मांग की थी। दो स्वतंत्र निदेशकों ने इस्तीफा तो दे दिया, लेकिन पुनीत गोयनका ने पद नहीं छोड़ा। 

जी लिमिटेड के बोर्ड ने पहले ही विलय के लिए मंजूरी दे दी है। पुनीत गोयनका मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बने रहेंगे। दोनों कंपनियों के टीवी कारोबार, डिजिटल एसेट्स, प्रोडक्शन ऑपरेशंस और प्रोग्राम लाइब्रेरी को मर्ज किया जाएगा। दोनों कंपनियों के बीच नॉन-बाइंडिंग अग्रीमेंट का करार हुआ है। डील का ड्यू डिलिजेंस अगले 90 दिनों में पूरा होगा। मौजूदा प्रमोटर फैमिली जी के पास अपनी हिस्सेदारी को चार फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी तक करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।

विस्तार

जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज लिमिटेड (Zee Entertainment) ने निवेशक इनवेस्को और OFI ग्लोबल चाइना फंड एलएलसी के खिलाफ बॉम्बे हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इन दोनों कंपनियों ने जी के मैनेजिंग डायरेक्टर पुनीत गोयनका को हटाने की मांग की है। इसके अवाला उन्होंने कई मामलों पर चर्चा करने के लिए असाधारण आम बैठक (EGM) बुलाने की मांग की थी। 

पुनीत गोयनका को पद से हटाने की मांग गलत 

इस संदर्भ में जी एंटरटेनमेंट का कहना है कि पुनीत गोयनका को एमडी पद से हटाने की मांग गलत और गैर कानूनी है। मामले में स्टॉक एक्सचेंज को दी गई जानकारी में जी एंटरटेनमेंट ने कहा कि वह शेयरधारकों के हित में ईजीएम नहीं बुलाएगी। मामले में कंपनी ने कानूनी सलाह ली है। 

अटक सकती है सोनी पिक्चर्स के साथ डील

राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण (एनसीएलटी) में इस मामले की सुनवाई चार अक्तूबर को होगी। इस संदर्भ में कानूनी जानकारों का कहना है कि अगर शेयरधारकों ने इन्वेस्को का साथ दिया, तो पुनीत गोयनका का पद से हटना तय है। ऐसे में कंपनी की सोनी पिक्चर्स के साथ डील भी अटक सकती है। मालूम हो कि अगर कोई कंपनी किसी कंपनी में 10 फीसदी से ज्यादा की हिस्सेदारी रखती है और वह ईजीएम बुलाने के लिए नोटिस देती है, तो कंपनी को तीन हफ्तों के अंदर ईजीएम बुलानी होती है। जी एंटरटेनमेंट में इन्वेस्को की करीब 18 फीसदी हिस्सेदारी है। 

इन्वेस्को का मानना था कि कंपनी का कॉर्पोरेट गवर्नेंस कमजोर है। इन्वेस्को ने ही जी एंटरटेनमेंट में दो स्वतंत्र निदेशकों और मैनेजिंग डायरेक्टर (MD) पुनीत गोयनका को हटाने की मांग की थी। दो स्वतंत्र निदेशकों ने इस्तीफा तो दे दिया, लेकिन पुनीत गोयनका ने पद नहीं छोड़ा। 

जी लिमिटेड के बोर्ड ने पहले ही विलय के लिए मंजूरी दे दी है। पुनीत गोयनका मर्जर के बाद बनने वाली कंपनी के मैनेजिंग डायरेक्टर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) बने रहेंगे। दोनों कंपनियों के टीवी कारोबार, डिजिटल एसेट्स, प्रोडक्शन ऑपरेशंस और प्रोग्राम लाइब्रेरी को मर्ज किया जाएगा। दोनों कंपनियों के बीच नॉन-बाइंडिंग अग्रीमेंट का करार हुआ है। डील का ड्यू डिलिजेंस अगले 90 दिनों में पूरा होगा। मौजूदा प्रमोटर फैमिली जी के पास अपनी हिस्सेदारी को चार फीसदी से बढ़ाकर 20 फीसदी तक करने की पूरी स्वतंत्रता होगी।